बुधवार, 29 अक्टूबर 2025

PUCL v. State of Maharashtra (2023): पुलिस मीडिया ब्रीफिंग पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन

 

PUCL v. State of Maharashtra (2023): पुलिस मीडिया ब्रीफिंग पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन

🔹 पृष्ठभूमि:

यह मामला पुलिस द्वारा मीडिया में जानकारी साझा करने (Press Briefing / Media Disclosure) से जुड़ा था।
कई बार पुलिस जाँच पूरी होने से पहले आरोपी के बारे में मीडिया में बयान देती है — जिससे निष्पक्ष ट्रायल प्रभावित होता है।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश:

  1. Union Ministry of Home Affairs (MHA) को तीन महीनों में मीडिया ब्रीफिंग के लिए दिशा-निर्देशों का मैन्युअल तैयार करने को कहा गया।

  2. सभी राज्यों के DGPs को सुझाव देने के लिए बुलाया गया।

  3. NHRC (मानवाधिकार आयोग) की राय को शामिल करने को कहा गया।


🔹 मुख्य सिद्धांत:

पुलिस और मीडिया दोनों को “Public Right to Know” और “Accused’s Right to Fair Trial” के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।


🔹 उदाहरण:

अगर पुलिस किसी आरोपी के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करती है और उसे अपराधी बताती है, तो यह आरोपी के अधिकारों का हनन है।
इसलिए, अदालत ने कहा — केवल आवश्यक जानकारी ही साझा की जाए, ताकि जाँच प्रभावित न हो।


📘 केस संदर्भ:

People’s Union for Civil Liberties (PUCL) v. State of Maharashtra, Supreme Court, 13 September 2023

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