PUCL v. State of Maharashtra (2023): पुलिस मीडिया ब्रीफिंग पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन
🔹 पृष्ठभूमि:
यह मामला पुलिस द्वारा मीडिया में जानकारी साझा करने (Press Briefing / Media Disclosure) से जुड़ा था।
कई बार पुलिस जाँच पूरी होने से पहले आरोपी के बारे में मीडिया में बयान देती है — जिससे निष्पक्ष ट्रायल प्रभावित होता है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश:
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Union Ministry of Home Affairs (MHA) को तीन महीनों में मीडिया ब्रीफिंग के लिए दिशा-निर्देशों का मैन्युअल तैयार करने को कहा गया।
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सभी राज्यों के DGPs को सुझाव देने के लिए बुलाया गया।
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NHRC (मानवाधिकार आयोग) की राय को शामिल करने को कहा गया।
🔹 मुख्य सिद्धांत:
पुलिस और मीडिया दोनों को “Public Right to Know” और “Accused’s Right to Fair Trial” के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
🔹 उदाहरण:
अगर पुलिस किसी आरोपी के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करती है और उसे अपराधी बताती है, तो यह आरोपी के अधिकारों का हनन है।
इसलिए, अदालत ने कहा — केवल आवश्यक जानकारी ही साझा की जाए, ताकि जाँच प्रभावित न हो।
📘 केस संदर्भ:
People’s Union for Civil Liberties (PUCL) v. State of Maharashtra, Supreme Court, 13 September 2023
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