बुधवार, 29 अक्टूबर 2025

आरोपी (Appellant) से एक मोबाइल फोन पर रिकॉर्डेड संवाद की पहचान के लिए आवाज़ के नमूने (voice sample) लेने का आदेश केश--Ritesh Sinha v. State of Uttar Pradesh (2019)

 

2. Ritesh Sinha v. State of Uttar Pradesh (2019)

तथ्य-परिचय

  • इस मामले में आरोपी (Appellant) का नाम Ritesh Sinha था। एक मोबाइल फोन पर रिकॉर्डेड संवाद की पहचान के लिए आवाज़ के नमूने (voice sample) लेने का आदेश जज द्वारा दिया गया था। Drishti Judiciary+1

  • मुख्य मुद्दा था कि क्या न्यायालय (मजिस्ट्रेट) को उस व्यक्ति से आवाज़ का नमूना लेने का अधिकार है, विशेष रूप से जब उस व्यक्ति को अभियुक्त नहीं माना गया हो, और क्या यह प्रक्रिया संवैधानिक अधिकारों (विशेषकर Article 20(3) – आत्म स्वीकृती का अधिकार, तथा Article 21 – जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करती है। Alec+1

न्यायालय की व्याख्या

  • सुप्रीम कोर्ट ने माना कि आवाज़ का नमूना लेने का आदेश आत्म-स्वीकृती (self-incrimination) वाले साक्ष्य (testimonial evidence) की श्रेणी में नहीं आता। NLU Website+1

  • अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट को यह अधिकार दिया जाना चाहिए कि वह जांच के प्रयोजन से किसी व्यक्ति से आवाज़ का नमूना ले सके, जब अन्य साक्ष्य (जैसे मोबाइल रिकॉर्ड) उसकी पहचान का समर्थन करते हों। Indian Kanoon+1

  • विशेष रूप से, क्योंकि संसद द्वारा इस विषय पर स्पष्ट प्रावधान नहीं बनाए गए थे, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया कि न्यायालय को इस शक्ति का प्रयोग न्यायसंगत उपाय (judicially controlled) के रूप में करना चाहिए। Law Finder Live+1

प्रमुख बिंदु

  • आदेश: “A Judicial Magistrate must be conceded the power to order a person to give a sample of his voice for the purpose of investigation of a crime.” Indian Kanoon+1

  • अदालत ने यह बताया कि इस तरह का नमूना अनुसंधान (forensic) उद्देश्य से लिया जाता है, और वह व्यक्तिगत बयान (testimonial) नहीं है, इसलिए Article 20(3) का दायरा नहीं बनता। gnlu.ac.in+1

  • हालांकि, यह भी कहा गया कि इस शक्ति का इस्तेमाल सतर्कता से, न्यायिक निगरानी के अंतर्गत किया जाना चाहिए।

विश्लेषण एवं आपके लिए बातें

  • आप आपराधिक लेन-देन में वकील के रूप में इस निर्णय का उपयोग कर सकते हैं जहाँ आवाज़ की पहचान, मोबाइल वार्तालाप, बायोमेट्रिक नमूने आदि की आवश्यकता हो।

  • यदि पक्षकार कहता है कि आवाज नमूना लेना संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है — तो आप इस निर्णय के आधार पर तर्क दे सकते हैं कि यह आदेश वैध है, बशर्ते प्रक्रिया शुद्ध हो और न्यायिक नियंत्रण हो।

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